जयाप्रदा की राजनीतिFeatured Article News politics 

अमर सिंह ने नहीं बल्कि इस नेता ने कराई थी जयाप्रदा की राजनीति में एंट्री

जब भी राजनीति में जयाप्रदा का नाम लिया जाता है तो उनके साथ साथ दिमाग में अमर सिंह और आजम खान का नाम अपने आप आ जाता है। अमर सिंह आजम खान और जयाप्रदा की कहानी बहुत पुरानी है। एक समय था जब यह तीनों साथ हुआ करते थे और उस समय आजम खान और जया प्रदा दोस्त थे। जयाप्रदा की राजनीति में एंट्री अमर सिंह ने नहीं बल्कि आजम खान ने कराई थी और इस बात का खुलासा खुद अमर सिंह ने किया। रामपुर से जयाप्रदा को चुनाव लड़ाने का फैसला आजम खान का ही था। जयाप्रदा के बहाने ही आजम खान ने कांग्रेस के किले रामपुर में फतेह हासिल की थी।

1989 से लगातार आजम खान कांग्रेस के किले रामपुर को जीतने का प्रयास कर रहे थे मगर उन्हें कभी भी सफलता नहीं मिल पाई। मगर 2004 में जब आजम खान जयाप्रदा को लेकर रामपुर पहुंचे तब जाकर समाजवादी पार्टी ने पहली बार 2004 के लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट से जीत हासिल की। उस समय अमर सिंह जी साथ में हुआ करते थे।

2004 के लोकसभा चुनाव में रामपुर की सीट जीतने के बाद आजम खान और जयाप्रदा दोस्त थे। अमर सिंह और आजम खान दोनों मुलायम सिंह यादव के बहुत करीबी माने जाते हैं। मगर कुछ समय बाद आजम खान के कारण जयाप्रदा से आजम खान की खटपट होने लगी। तब दोनों की दोस्ती में दरार आ गई और फिर फिल्म इंडस्ट्री से जयाप्रदा को फोन आने लगे। जिसकी वजह से जयाप्रदा को रामपुर से जाना पड़ा मगर जब जयाप्रदा दोबारा वापस आईं तो उन्होंने आजम खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

तब से चली आ रही जयाप्रदा और आजम खान की यह दुश्मनी आज तक जारी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी रामपुर से आजम खान के खिलाफ जयाप्रदा मोर्चा खोलेंगे और पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे दिलचस्प लड़ाई रामपुर सीट को लेकर जयाप्रदा और आजम खान के बीच में ही होगी।

 

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